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Aside

मेरे दो नैनो से पढ़  लो

तेरे दो नैनो कि बोली 
जीवन कि संपूर्ण कहानी
इनमे  करती आंखमिचोली
 
अजब अनूठी इनकी भाषा
खट्टी,मीठी,कुछ-कुछ झूठी;
पलकों के परदे के पीछे 
सपनो और सच की रंगोली
 
          इन्द्रधनुष सी चुनर  ओढ़े  
          धूप, कभी बदरी में खेले
          कभी कोर से हंसी झांकती
          कभी छलक जाते दो नैना
 

          रोको ना इन मतवालों को 
         जब मचलें ये हाथ छुड़ा के 
          ना डालो इन पे चादर जब
         उफन उठे मदमस्त ये नैना

मेरे इन नैनो में बसते
तेरे ही ख़्वाबों के फेरे
खुली पालक या बंद नयन हो
भरी धुप और रात अँधेरे

कब का खोया खुद को मैंने
हर पल तुझको ही पाने में
अब तो मेरे भी ख़्वाबों के
तेरे दो नैना हैं चितेरे

जब खुल के विस्तृत होते हैं
दो कोपल तेरे अधरों के
मुस्काते हैं उसी झरोखे में
ख्वाब मेरे रंग बिखेरे

फिर भी जाने क्यों ना माने
तेरे नैना मुझे ना जाने
बार बार पूछा करते हैं
खुश तो हो ना तुम संग मेरे

हँस देते हैं पागल नैना
छलक छलक के ढुनक ढुनक के
धोकर कलुष जगत के सारे
फिर तुझ संग नव लेते फेरे !!

rainbow