Category Archives: shaayaraana

आहटें

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खुशनुमा सा लगे समां क्यों है
किसके क़दमों की आहटें आतीं
चाँद पूनम का रात शबनम सी
साँस फिर एक ज्यों ग़ज़ल गाती

:)

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सुरूर-ए-जिंदगी छाने लगा है फिर
बस इक ही आरज़ू बाकी है जीने को

तुम्हे हो ना हो, हमको तो यकीं है
ख्वाब होंगे मुकम्मल, चैन से सो लो ।