Category Archives: life

जीवन परिणय

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किस डगर कोई बंधु मिलता
किस डगर कोई पत्थर चुभता
दुख हो या हँसी चिंता ही नहीं
बस राह पे बढ़ते जाना है

इच्छाओं को सपनों सा सजा
जो मिला उसे ही अंक लगा
ओढ़े आशाओं का आँचल
पल पल डग भरते जाना है

आँसू को गंगाजल सा पी
पहने माला मुस्कानों की
साँसों के सप्तम पगफेरे
जीवन पर्यन्त निभाना है

अधरों हों गीतों की सरगम
नयनों में इंद्रधनुष के रंग
करुणा से ओतप्रोत हो ह्रदय
और प्रीत अगन जल जाना है!

चाँद के साथ साथ….

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कितने रूपों में देखते रहे हैं चाँद तुम्हे
बचपने के झूलों से कभी हँसते हुए
लड़कपन की आरजुओं में कभी रंग भरे
प्रेयसी सा कभी, चिट्ठी कभी, खिलौना कभी
कभी मामा बने चन्दा कभी रोटी भी बने
कभी बादल के आँचल में बिंदी सा सजे
देख तुमको याद किस किस को किया दिल ने मेरे
कह तुम्ही से ना जाने कितने किये शिकवे गिले
उम्र गुज़री रूप बदले रोज़ ही तेरे मेरे
आज भी वोही मगर झूला, वो ही चाँद तले
कुछ यादें, कुछ  किस्से, कुछ मुस्कानें पलें
हसरतें कुछ, फुरसतें कुछ, थाम के वक़्त चले !

कह दो ना….

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रखो ना क़ैद में हर्फ़
रख ना पाओगे।
बोल लम्हों से जुड़े है
वहीँ खो जायेंगे
उम्र चढ़ती चलेगी
दौर गुज़रते रहेंगे
वही तुम होंगे ..वही हम
अलफ़ाज़ वही,
मायने बदल जायेंगे !

Desires

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The desires
Are like raindrops
Tiny
Yet numerous
Which pour
In volumes
Drenching thyself
Yet not quenching
The undieing thirst
…..
The driving force
To struggle
The yearing
To win
The hope
For warmth
The lust
For love
Embracing it all
They keep
Growing tall
Life’s fire
A worthy “Desire”!!!

अधूरी सारी बातें

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रात आधा चाँद मुझको ताकता है
और आधा जाम आँखों में घुला है

बोल आधे ही घुले से बात में हैं
नैन आधे ही खुले, कुछ ख्वाब में हैं

चल दिए कुछ दूर तक धीरे से बादल
और आधी दूर जाके क्यों रुके हैं

रात रानी की महक आधी उड़ी सी
और कुछ फूलों में बस के रह गयी सी

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते-

चाँद मेरी खिड़की में से झांकता सा
बादलों का जिसपे पर्दा सा गिरा है

रात रानी खुशबुएँ बिखेरती सी
गुलदान में खड़ी शरमा रही सी

रोज़ ही एक ख्वाब बनता है कहीं पे
हाथ तेरे ख्वाब मेरे पालते हैं

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!!!

लत

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जो उतर रही हलक से
हो करीब तेरे लब के
वो जला रही मुझे है
मेरी रूह पे हैं छाले

कहीं दूर थाम खड़े तुम
कई जाम खनखनाते
मेरे कानो में अनायास
ज्यो बिखर रहे हैं प्याले

जो मैं हाथ थाम पाती
तेरे मन को भरमाती
तो नशा नज़र का होता
बेज़ुबानी गाती तराने

कभी हार मान जायें
कभी कोशिशें जुटायें
ये दिल अजब है वहशी
किस्मत के दाँव डाले

नाराज़गी भी तुमसे
मुस्कान भी, कसम से!
कभी छोड़ना ना ये दामन
या रब, कसम ये उठा ले ।

ये ही “शब्द” गूंजते हैं
होनी को गूंथते हैं
इनकार कर ना; तू डर ना
मेरे सुर से सुर तू मिला ले ।।

कुछ कमी सी….

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शब्द आते है लौट जाते हैं
मिसरा अटका हुआ है जैसे कहीं
रात भी बीत चली है लेकिन
सुबह भी अब तलक हुई ही नहीं

इन पहाड़ों की हसीं वादियों में
कुछ कमी सी रह गयी है कहीं
सर्द झोकों की याद आती है
बूंदों में कल नमी भी थी ही नहीं

रोज़ होठों पे तैर जाती है
वो अधूरी सी कुछ लगे है हँसी
कुछ तेरी आँख में जो ठहरें हैं
सवाल वो मिटेंगे भी क्या कभी?

ख्वाब पागल ये

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सुबह अंगड़ाई सा उगता
बिखेरे बाँह किरणों की
नज़र पड़ते ही मुझपे
दौड़ के भर लेता बाहों में
और तब तक गुद्गुगाता
ना खोलूँ आँख मैं जबतक
ये सूरज रोज़ ही आके चुराता
मुझको ख़्वाबों से ..

बड़ा ज़िद्दी है पागल मन
हाथ थामे रहे दिनभर
चढ़ाता सर पे दोपहर
शाम बाहें कमर डाले
और हौले सुला देता
रात ओढ़ा के फिर चादर
आँख फिर से चमक उठती
जो चलती मिलने ख़्वाबों से।

ख्वाब भी कितने शर्मीले
नज़र दिन से चुराते हैं
रात चँदा के आँचल में
बंधे मन को लुभाते हैं
कभी बादल में उड़ते तो
कभी तारों में बस जाते-
तेरे नयनों के कुछ सपने
मिले कल मेरे ख़्वाबों से ।

तभी से ख्वाब जो थे
कल तलक पूरे ही मेरे से
आज आधे है तेरे
और हैं मेरे अधूरे से
कभी आँखों में मेरी झांकते
नींदें उड़ा देते
कभी पलकों में तेरी जा रुकें
तुझको भी तंग करते
रोज़ इनको भगाती हूँ
रोज़ मुझको सताते हैं
खता तुमसे करें तो माफ़ करना
ख्वाब पागल ये !!

चलो

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चलो आज बैठे यमुना के तीरे
अलकों से सुन तेरे मन के मदीरे
नयन मूँद के तुमको देखा करें हम
समय को कहें कुछ चले धीरे धीरे

चलो आज सुनतें पवन की कथाएं
तेरे स्पर्श से सब मिटा के व्यथाएं
गगन सा बनाए विस्तार अपना
सितारों की जगमग सा जीवन सजाएं

चलो आज बचपन में फिर खो जाएँ
अकारण किन्ही राहों पे दौड़े जाएँ
हँसें बिन किसी बात निश्चल ह्रदय हम
जहाँ साँस टूटे, थकें, सो जाएँ

चलो आज पूछें ना कुछ भी किसी से
ना तुम भी मुझसे; ना ही मैं भी तुमसे
अभी के क्षणों में विश्वास रख के
इसी युग-पलों में उमर एक बिताएं

चलो आज फिर हाथ में हाथ थामें
ना बातों के अश्वों को दें कुछ लगामें
मैं फिर से पुकारा करूँ नाम तेरा
सुकूं में तेरे साथ के मुस्कुराऊं