Category Archives: emotions

रात.

Standard

रात सिसकी भी सो नहीं पायी

बरसा करते रहे बिना मौसम
जाने आये कहाँ से कल बादल
शोर बूंदों ने इस कदर ढाया
नींद डर से इधर नहीं आयी

कुछ कमी सी….

Standard

शब्द आते है लौट जाते हैं
मिसरा अटका हुआ है जैसे कहीं
रात भी बीत चली है लेकिन
सुबह भी अब तलक हुई ही नहीं

इन पहाड़ों की हसीं वादियों में
कुछ कमी सी रह गयी है कहीं
सर्द झोकों की याद आती है
बूंदों में कल नमी भी थी ही नहीं

रोज़ होठों पे तैर जाती है
वो अधूरी सी कुछ लगे है हँसी
कुछ तेरी आँख में जो ठहरें हैं
सवाल वो मिटेंगे भी क्या कभी?

चलो

Standard

चलो आज बैठे यमुना के तीरे
अलकों से सुन तेरे मन के मदीरे
नयन मूँद के तुमको देखा करें हम
समय को कहें कुछ चले धीरे धीरे

चलो आज सुनतें पवन की कथाएं
तेरे स्पर्श से सब मिटा के व्यथाएं
गगन सा बनाए विस्तार अपना
सितारों की जगमग सा जीवन सजाएं

चलो आज बचपन में फिर खो जाएँ
अकारण किन्ही राहों पे दौड़े जाएँ
हँसें बिन किसी बात निश्चल ह्रदय हम
जहाँ साँस टूटे, थकें, सो जाएँ

चलो आज पूछें ना कुछ भी किसी से
ना तुम भी मुझसे; ना ही मैं भी तुमसे
अभी के क्षणों में विश्वास रख के
इसी युग-पलों में उमर एक बिताएं

चलो आज फिर हाथ में हाथ थामें
ना बातों के अश्वों को दें कुछ लगामें
मैं फिर से पुकारा करूँ नाम तेरा
सुकूं में तेरे साथ के मुस्कुराऊं

The fall

Standard

I fall in love
Everytime I know you
A little more each day
A lot more each year
Falling in love
With your strengths
Falling in love
With your imperfections
Falling in love
For your loving me
Falling in love
“Even when I didnt”
For its not I care
How the world paints you
Or how you show yourself off
I care for the glimpses
Of human I see
Sneaking out from the
Most unnoticed of you
I care for the warmth
That you effortlessly extend
To one and all
Unconditionally
And little did u realize??
How each time
I fall for the smile
I fall for the glance
I fall for the embrace
I fall for the surprises
I fall and I fall….
I fall for YOU !

झूला

Standard

झूले पे अधलेटे
चँदा को हम देखें
धीमे धीमे हिंडोले पे थे डोलते
कभी नज़र में आता
कभी छिपा कहीं जाता चाँद!

मोगरे की खुशबू
मदमाती, बहकाती सी
और गोदी सर तेरा-
ग़ज़लों के शेरों की
चाशनी में डूबा सा चाँद !

रुक जाता वक़्त वहीं
हम तुम के लम्हों में
कितनी ही बातों के
कितनी ही चुप के भी
भेद को बटोर चला चाँद!

दिन भर के शिकवे शिकायत,
किस्से कहानी,
नगमों की रूह,नज़्मों की जुबानी,
मेरी हाथों की किताबों के साथी पल
नज़रों में झाँक मेरी, देख रहा चाँद !


May’2015
Lovliest Gift !

क्यूँ

Standard

क्यूँ…

कितनी बातें
कितनी यादें
कितनी गलतियाँ
पूछ पूछ थकें

हर नज़र
हर वक़्त
हर जुबां
एक ही प्रश्न

मीत ने उठाया
मन ने दोहराया
रिश्तों ने सुनाया
पलट पलट आया

ना कोई जवाब
ना कोई बचाव
गहने सा साजये
चेहरे से छुपाएं

और दिन भर के बाद
दुनिया से भाग
जो आइना देखूँ
तो सामने पाऊँ

वो ही एक सवाल
खुद से दोहराते
ना कोई जवाब
फिर भी रहे “क्यूँ” !

नींद

Standard

जगे हैं देर तक बहुत
थोडा और सोने दो
करो बादल से कुछ सौदा
थोड़ा सूरज को ढक लो

आस से झिल्मिलातीं
भोर की किरणें मिटा देंगी
सभी कारण पड़े रहने के
उनको कैसे भी रोको

और कहना बादलों से
बरस जाएँ ना धोखे से
करें बूंदों की रिमझिम शोर
मुझको चुप में रहने दो

ना महके आज रजनीगंधा
भँवरें उनपे ना डोलें
ये मेरे मन को भाने वाले
सारे खेल बंद कर दो

तुम्हे जाना है तुम जाओ
जगत में विचर के आओ
पीड़ से टूटते हैं पैर
मुझको यहीं रहने दो

और ले जाओ अपने साथ
मेरी सोच के पहरे
सोना आज है गहरा
अकेला मुझ को रहने दो