Category Archives: dreams

अधूरी सारी बातें

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रात आधा चाँद मुझको ताकता है
और आधा जाम आँखों में घुला है

बोल आधे ही घुले से बात में हैं
नैन आधे ही खुले, कुछ ख्वाब में हैं

चल दिए कुछ दूर तक धीरे से बादल
और आधी दूर जाके क्यों रुके हैं

रात रानी की महक आधी उड़ी सी
और कुछ फूलों में बस के रह गयी सी

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते-

चाँद मेरी खिड़की में से झांकता सा
बादलों का जिसपे पर्दा सा गिरा है

रात रानी खुशबुएँ बिखेरती सी
गुलदान में खड़ी शरमा रही सी

रोज़ ही एक ख्वाब बनता है कहीं पे
हाथ तेरे ख्वाब मेरे पालते हैं

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!!!

देखो पंख लगे हैं गाने

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दूर गगन में फैलाये पर
चाँद को छू लेने को तत्पर
नन्ही चिड़िया छोड़ घरोंदा
आज भरे ऊँची उड़ाने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

चीलों का डर नहीं सताता
ना थकान से मन घबराता
मिटा असंभव का अस्तित्व
उड़े आस के छेड़ तराने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

खेल सभी बचपन के छूटे
लहु यौवन का बाहें खींचे
तान उमंगों की कमान
जग को अपनी हस्ती दिखलाने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

ख्वाब पागल ये

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सुबह अंगड़ाई सा उगता
बिखेरे बाँह किरणों की
नज़र पड़ते ही मुझपे
दौड़ के भर लेता बाहों में
और तब तक गुद्गुगाता
ना खोलूँ आँख मैं जबतक
ये सूरज रोज़ ही आके चुराता
मुझको ख़्वाबों से ..

बड़ा ज़िद्दी है पागल मन
हाथ थामे रहे दिनभर
चढ़ाता सर पे दोपहर
शाम बाहें कमर डाले
और हौले सुला देता
रात ओढ़ा के फिर चादर
आँख फिर से चमक उठती
जो चलती मिलने ख़्वाबों से।

ख्वाब भी कितने शर्मीले
नज़र दिन से चुराते हैं
रात चँदा के आँचल में
बंधे मन को लुभाते हैं
कभी बादल में उड़ते तो
कभी तारों में बस जाते-
तेरे नयनों के कुछ सपने
मिले कल मेरे ख़्वाबों से ।

तभी से ख्वाब जो थे
कल तलक पूरे ही मेरे से
आज आधे है तेरे
और हैं मेरे अधूरे से
कभी आँखों में मेरी झांकते
नींदें उड़ा देते
कभी पलकों में तेरी जा रुकें
तुझको भी तंग करते
रोज़ इनको भगाती हूँ
रोज़ मुझको सताते हैं
खता तुमसे करें तो माफ़ करना
ख्वाब पागल ये !!

झूला

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झूले पे अधलेटे
चँदा को हम देखें
धीमे धीमे हिंडोले पे थे डोलते
कभी नज़र में आता
कभी छिपा कहीं जाता चाँद!

मोगरे की खुशबू
मदमाती, बहकाती सी
और गोदी सर तेरा-
ग़ज़लों के शेरों की
चाशनी में डूबा सा चाँद !

रुक जाता वक़्त वहीं
हम तुम के लम्हों में
कितनी ही बातों के
कितनी ही चुप के भी
भेद को बटोर चला चाँद!

दिन भर के शिकवे शिकायत,
किस्से कहानी,
नगमों की रूह,नज़्मों की जुबानी,
मेरी हाथों की किताबों के साथी पल
नज़रों में झाँक मेरी, देख रहा चाँद !


May’2015
Lovliest Gift !

Chrismas Wishes

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Santa uncle come to me
Lots of things I want from thee
Car like Noddy that I can ride
Aeroplane which I can fly

Pup as sweet as Scooby Doo
Wagging its tail by my side
And a hut in “Toy Land”
With fence of Lolly-pops and smile

Come when stars are twinkling bright
On the “Merry Christmas” night
Don’t you shy away from me
Stay for a while in my sight

When we dance as bells jingle
In your arms I will glide
Snuggle with your snowy beard
Those moments shall be divine

I will also ride the sledge
Peep for what in your bag lies
And do tell me the secret
How your treasure never dies

Wishes small of tiny me
Do fulfil I pray to thee
And then join me for the tea
Mom welcomes all friends of mine !


@ Kaustubh Srivastava
Class : Brownie
Little Pixies Play School
Dec 2003

परछाई

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बहुत सी बात कहनी है
बहुत सी बात सुननी है
वो एक अधूरी दास्तां
अपने दामन से चुननी है

कभी हम कह नही पाते
कभी तुम रोक लेते हो
कुछ तो खुद ही से हम हारे
और कुछ ऐंठ के मारे

अब तो डर सा सताता है
तार ये जो जुड़े दिल के
कहीं कल चरमरा जाएँ
ये भी जंग के मारे

ना कोई मोम ही पिघले
ना कोई तेल की परतें
रोज़ ही धुप में पकते
कभी बारिश इनपे बरसे

चाँद भी आये जब जब लेके
मलहम सर्द रातों का
तेज़ कर जाए चढ़ना
तार पे जंग यादों का

रोज़ देखे मुझे छुप छुप
और नज़रें चुराए भी
मन में ही रहती है हरदम
और मन से ही भागे भी

बहुत ज़िद्दी है तेरी याद
बिलकुल तेरे जैसी है
बस इसी बात से ये साथ
परछाई सी रहती है ।

सूरज चाचा

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बहुत सवेरे उठ जाते हो
रात भी जल्दी सोते होंगे
सूरज चाचा कभी कभी तो
तुम सोने को रोते होंगे
कौन तुम्हारी मम्मी है जो
इतना जल्दी तुम्हे उठाये
कभी नही सुनती जो तुम्हारी
रोज़ शाम वो तुम्हे सुलाये
कभी तो मन ये करता होगा
जागो रात तक चाँद देखने
तारों के नीचे लेटो और
आसमान पे चित्र बनाओ
और गर्मी की दोपहरी में
नींद भरी अँखियाँ झपकाओ
नीम तले दो पल बैठो और
एक चुटकी निंदिया ले पाओ
कितना रूखा जीते जो तुम
रोज़ एक ही रूप दिखाओ
वो ही पूरब से उदित हो
वो ही पश्चिम में ढल जाओ
चलो दोस्त मेरे बन जाओ
मैं तुमको जीना सिखला दूँ
जब मन चाहे हँसते रहना
जब मन हो रोना बतला दूँ
परी कहानी के तुम राजा
मैं राजा की गोद में खेलूं
तुमसे जग की डोर चले है
मैं जीवन की झप्पी ले लूँ ।