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वक़्त बदल जाता है

कल जो मुझको दिखलाते थे

अपने पाँव का छाला

टीस पे मेरी एक पल भी ना

तूल उन्होंने डाला

चेहरा के पीछे का चेहरा

कौन समझ पाता है

वक़्त बदल जाता है

मोहित कौन भला रह पाए

एक रूप यौवन पे

इधर फिसलता, उधर मचलता

बस नहीं चंचल मन पे

जनम जन्मांतर के बंधन

कौन निभा पता है

वक़्त बदल जाता है

सुंदरता की उमर में फिरते

आगे पीछे भँवरें

और फिसलती उमर में कोशिश

मन सुंदरता संवरे

क्या तन, मन दोनो के तेजस

कोई बचा पता है ?

वक़्त बदल जाता है

भगवन रूप बदलता रहता

भक्त गणों के मन में

दिन फिरते से रूप बदलता

पूजा और प्रवचन में

इंसान को क्या हासिल जो

ईश्वर ना पा पाता है

वक़्त बदल जाता है

!

वक़्त बदल जाता है