Monthly Archives: July 2019

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कभी कभी तुम “तुम”लगते हो

“आप” कभी फिर बन जाते हो

चलते, फिरते, हँसते, मिलते-

कितने रंग बदल जाते हो

भूल कभी से करूँ ठिठोली

आप को रंग दूँ तुम की होली,

रूठ ना जाना -पर सख़्ती से

डाँट लगाना , प्रश्न उठाना ।

रिश्ते के जामे के रंग को

रंगरेज समय से बचाना ।

सही ग़लत के प्रखर पारखी ;

भूल मेरी ना हृदय लगाना !

आज बैठ पूछे है मुझसे

ज़िद ठाने तूलिका हठ से

बैना सूने, नैना सीले,

पूछ रहे हो जैसे तुझसे

फिर कब बोलियाँ फूटेंगी?

ज़िद तेरी मेरी टूटेगी ?

ना तुम बोलो, ना चुप मैं हुँ

ये बिसात कैसे पलटेगी

रूठ के तुमसे तजी तूलिका

याद तुम्हें कितना करती है

नित ठहरी कुछ कुछ लमहों पे

फिर फिर थोड़ा सा रिसती है

अब शायद इक ही आशा है

जो थोड़ा गर शेष बचा है

याद कभी तुम भी कर लेना

माफ़ मुझे कर बस हँस देना

आस यही स्पंदन करती है

कर्मों का मंथन करती है

जो कान्हा थोड़ा मुझमे है

उसके दर संबल धरती है

कभी तो मुझ तक आ जाएँगे

शब्द तेरे चुप रहने वाले

बिन बादल बरसा जाएँगे

स्नेह , प्रशंसा के कुछ दाने

नैन मूँद देखूँ वो पल मैं

एक सपने का पूरा होना

कितनी छोटी सी दुनिया है –

“आप” में “तुम” का पाना खोना !

Tum

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लो मन चला समेटने

चादर भीतर ठौर

वो मन जिसकी चाह की

थाह मिले ना छोर

कैसी छेड़ी रे सखा

तुमने आज तरंग

बादल संग बरसन लगे

मन के ताल मृदंग

हुए विलुप्त ज्यूँ फेंक तुम

कंकर एक मन ताल

जाने कब से शांत था

विचलित अब बेहाल

उधर बरसते मेघ है

इधर भीगते गाल

भीड़ भाड़ में एकल रह

मन फिर करे सवाल …..

17/7/19

पहली बारिश