Monthly Archives: September 2018

Quote

बप्पा अबकि बार यूँ आना

मोदक मन-मिठास के लाना

मूषक सम वर देना जग को

बिन “petrol” जुगाड़ बिठाना

दृष्टि ऐसी, नेता जैसी

जो ना चले उसको भी चलना

श्रवण सुरीली तरंगें गूँजें

हाहाकार को ऐसे दबाना

साधन का वरदान शीश धर

रिद्धि सिद्धि की ज्योत जगाना

राहु ग्रहण चहु ओर व्याप्त है

तुम केतु का स्वाँग रचाना

केंद्रित और अनुशासित हम हैं

मुद्रा वर्षा तुम कर जाना

भाल विशाल गहन चिंतन में

जग कल्याण का लक्ष्य उठाना

दस-दिवसीय ज्योत धारी है

सहज बुद्धि तुम देकर जाना

अजं निर्विकल्पं निराकारमेकम

प्रभु स्वयं सार्थक सिखलाना

मोदक मन-मिठास का लाना

बप्पा अबकि बार यूँ आना

गणपति बप्पा मोरया

Quote
प्रभु यहाँ सुनो,
प्रति सुबह शाम
दो पल दो चार शब्द कहके
फिर दिन भर चुप सी रहती है
या एक मुस्कान कभी झाँक
होंठों पे ताला रखती है
उन अधरों के भी शब्द पुराने
जो खोए या छिपे कहीं
वापस कर दो
व्रत जो बोलो
निभ जाएगा
जो भोग कहो
पारण कर दें
अपने भक्तों की त्रुतियों को
प्रभु जी हर लो
और एकांकी की पीड़ा से
मन आँगन को
मुक्त कर दो
प्रभु जी वर दो !

वर दो प्रभु जी

Quote

चखा है स्वाद कागज़ का

चटोरा हो गया है मन

जिधर दिख जाए रीता कोई पन्ना

ये मचल जाता

बिखर जाती है स्याही

शब्द तोड़े बाँध बह चलते

मूक अधरों के गीतों को

सुर-ओ-आवाज़ दे कलम!