Monthly Archives: July 2018

Quote

बरस बरस के ठहरने को तरसता पानी

वक़्त की चाल से क्यूँ कर है पलटता पानी ?

.

तराशता तेरे लम्हात मेरे लफ़्ज़ों में

हर एक शै पे लिपटता तेरे जैसा पानी

.

हम उलझते कभी तन्हाई की ख़ामोशी से

शोर अपने से कभी दूर खिसकता पानी

.

ना जाने ढूँढ रहे किसको तेरे साये में

तेरे होने से किस क़दर रोज़ लड़ता पानी

.

अक़्स ख़ुद का आज अनजान हुआ जाता है

चेहरे पे रंग नए रोज़ परखता पानी

.

बरस बरस के ठहरने को तरसता पानी

वक़्त की चाल से क्यूँ कर है पलटता पानी ?

-28/7/18

1:10 am

Dagshai

Quote

बरस गया रे आस सज़ा रे

आओ बरसो मेघा प्यारे

ऐसा भी क्या घिर के आना

बिन बरसे मुँह मोड़ के जाना

प्यासी धरती, तरूवर सारे

हाथ जोड़ अब तुम्हें पुकारें

घन घनघोर रूप दिखलाओ

रवि पे विजय पात लहराओ

छन छन , टप टप ताल मृदंगी

अविरल कानों को सुनवाओ

पल्लव पल्लव आँचल सीले

माटी मादक गंध में भीगे

धूल-धूसरित जगती सग़री

मुँह धो अपना अंग निखारे

धनुक ओट से बाहर झाँके

कीट पतंग मंडूक सब आके

अपनी अपनी धुन में ताने

स्वागत की पंचम में गायें

रूप तांडवी आ दिखलाओ

जन जन का जयकारा पाओ

ओ रे मेघा प्यारे मेघा

कहाँ छिपे जग न्यारे मेघा

किस कर्मठता से थक हारे

रुके कहीं विश्राम के मारे?

न्योता भेजें, रथ सजवाएँ?

कौन विहग संदेश ले जाए ?

देश बताओ, पता लिखाओ,

सागर मंथन फिर करवाओ।

रूठ गए क्या मनुज करम से ?

कौन जतन जो ताप मिटाओ ?

यज्ञ हवन के प्रण से मानो?

जल है जीवन प्राण ये जानो ;

क्लांत, रुग्ण सब हाथ पसारे

अनगिन नैना बाट निहारे

बरस गया रे आस सज़ा रे

आओ बरसो मेघा प्यारे!!

मेघा

Quote

“I’d”, said the id

And grabbed at first opportunity

A long held desire!

For years the superego

Has been the master;

Holding fort-

To decide

What comes,

What goes,

What is to be kept,

What’s to be given aaway.

And the righteous superego

Is winning accolades,

Fetching praises,

Crowns of appreciation,

Garlands of embraces,

Showers of blessings,

And has been

Smiling through the core…

The happy heart smile,

The sad heart smile,

The baby heart smile,

The yearning heart smile,

-just happy all way long

Patting the mighty ego,

Tamed and trained,

Gaurded and guided,

Wining silent frames!

And one day,

All of a sudded;

The days seemed changed-

The ego and the superego

All lost to the decades old name:-

That peeped from yesteryears,

And glanced back a smile.

A warm, loving, hugging curve

That yeilded to longing child-

The child within,

With nascent “Id”.

And gave in to

All its desires-

Living for itself,

Loving the life,

Not fighting for the garlands,

And praises and crowns,

But blissfully imbibing

The warm loving bribes,

Pampering the baby

With wishes all fulfilled;

Oh what a delight

The Id factor brings !

The ego and superego

Fight for stupid throne !

Its Id that wins the battle

And makes the hollow a whole !!!!!!

Id, ego, superego

Quote

धरा पर रख शर

प्रण करा

जग मन हरा

कौतूहल बढ़ा

दिन ब दिन चढ़ा

तज अन्न औ जल

पग जो धरा

एक स्वांग कि

एक व्रत बड़ा

लो इसपे भी

विवाद खड़ा

भ्रकुटी तनी कुछ

दंगा कुछ बढ़ा

इस कोहराम में

आँखों से बचा

भोज को स्वाद ले

किसने ना चखा

चेते जग ज़रा

उसके पहले ही

शर ओ शब्द चला

फिर निरीह बना

जनता मान गयी

जादू ऐसा चला

नेता एक नया

अनशन से फिर बना!

अनशन

Quote

Kitni beet gayi kitni Baqi hai

Mujhe aye zindagi

Yehi

tera hisab lay behta!!!!

: Shalini

Kal baaki ka hisaab karte

Pal pal bedum roya maine

Aur beeti ko yaad karte

Is pal ko bhi khoya maine

.

Beti ya baaki kya dekhun,

Jeena to bas is pal mei hai

!

: me

Conversation in verses

Quote

एक अकेला चाँद ही नहीं
हम भी जागे हैं,
बादल से ही उलझे उलझे
मन के धागे हैं!

Quote

Happy Biryani
Gosht nd roomali
Raita nd shorba
May add thoda korma
Kebabs but no sharaab
Allowed in house shabaab
Kuch tareef Ke kaseede gaayein
To sevaiyan nosh farmayein

🌙✨

Eid Mubarak !!!!!!!

.

.

.

.

From 2016 archives

.

Eid Mubarak

Quote

उम्र की अल्हड़ सीढ़ी से

झलकी सफेदी की देहलीज़ तक

कलम हाथ में लिए

कई कई दिन

कागज़ की देहरी पे रुके!

कुछ हर्फ बढ़े

कुछ हर्फ ठहरे

और दर पे तेरे

आते आते

कुछ पलट गए

!

दूर रुक कर देखूँ

तो खयाल आता है

कितनी फितरत बदली होगी

उम्र उम्र में हरफों की?

और कितने खयाल बदले होंगे

हर्फ हर्फ में उम्र से?

या शायद ही कुछ बदला हो –

बस समझ समझ का धोखा हो!

:

जो ठहरे वो जीना सीखे

जो रुक ना सके, वो पल में मिटे

जो पलट गए, वो कागज़ पे

आधा सा कहीं दीवान बने

किस किस ने गुनगुनाया होगा

उनको जो एक कलाम बने

किस धुन को थाम किसी धड़कन ने

अपने भी पैगाम लिखे

उम्र की अल्हड़ सीढ़ी से

झलकी सफेदी की देहलीज़ तक

ये कलम-ओ-कागज़ के इश्क़ में

हम मुफ्त में ही बदनाम हुए!!!

Genesis: a collage of big B in various ages with same pose…. And rest as they say is all story!

ख्वाहिशों के खत