Monthly Archives: May 2018

Quote

मै छाँव बिछाये बैठी हूँ

तुम आओ कुछ पल बैठो तो

जब तक तपती धरती पर हो

कुछ बातें लू सी लगती हैं

और शब्द शब्द झुलसाती हैं

पर छाँव तले वो ही बयार

पत्तों से छनकर तपस त्याग

कितनी ठंडक पहुँचाती है

मै छाँव बिछाये बैठी हूँ

तुम आओ कुछ पल बैठो तो

तुम आओ तो

Quote

I stayed in trance

With superfluous words

Unveiling

The helplessness

And restlessness

And each word

Adding new dimensions

To what was never meant

In that precious possession

Turning it

Sometimes to addiction

Or an obsession

Or Maddness

Or poison

Turning to everything

Unwanted

In what still stands

By me

In each moment said unsaid

And

Peeping through the shadows

Of the past

Is an unparallel warmth

Maintaining fractional sanity

Waking me time and again

Whether or not I Accept

The saviour “l”

That’s loved by many

Steps out

Takes charge

When about to give up

The ones who look up to me for strength

Hold me

And

I live!

I “live”

Quote

एक दिन लौटी

तो एक साया साथ ही आया

दिन ढल चला था

रात गहराई हुई थी

रात की सियाह में

अक्स भी मिट चला था मेरा

जो साथ आया वो यकीनन मेरा तो

था ही नहीं

साथ ही रहने लगा वो

मेरा सा होके मगर

और एक अक्स सा रिश्ता

बना लिया मुझसे!

दिन गुज़रते गए

साल ढलते गए

अब मेरे साथ-साथ

साये दो-दो रहते हैं

तर्क करते हैं कभी

साथ हँसते हैं कभी

और अक्सर ही

गुफ्तगू मुझसे कहते हैं

बड़ी हलचल सी मचा रखते हैं

सूने मन में

यार पक्के वो मेरे बनके

मुझको सहते हैं

इतनी आदत सी हो चली है

अब तो उनकी मुझे

सारी दुनिया को रखके दूर

उनका हाथ पकड़

ना जाने घूमता है मन

बावरा किधर किधर,

बिगड़ गया है

एक पल नहीं रहता है ठहर

भीड़ दुनिया की सताने लगी है

अब मुझको

दोस्ती ख़ुद की ही भाने लगी है

अब मुझको

लोग कहते हैं

बेचारी बड़ी तन्हा सी है

हंसी उस समझ पे आने लगी है

अब मुझको

कब भला दुनिया मुझे ठीक

समझ पायी है?

किसने मुझसे रस्में रिश्तों की

निभायी हैं?

वो जिसने मुझमें झाँक कर

मुझे पहचान लिया

उस एक शख्स पे तलवारें

क्यू उठायी हैं?

कौन इन खामखा बातों पे

वक़्त ज़ाया करे

एक मेरा एक तेरा

जो साथ साया चले

उनकी आगोश में जन्नत सी

सिमट आई है

अब तो दुनिया से लाख अच्छी

ये तन्हाई है!

तन्हाई

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एक बुढ़ापा गिनती करता
उम्र सैकड़े तक ले चलता
एक जवानी भी ना आई
आँख खुली और मुंदती जाये

देखे खेल बहोतेरे जग में
करनी तेरी समझ ना आई
किस को दे तू किस से लेले
विधि विधान के नाम से खेले

करम आज के फल जाने कब
खिलते फूल; कली मुरझाई.. .

_

एक सुनेहरा रिश्ता टूटे

एक चाटकता, घिसता चलता

मन से मन के तार जुड़े ना

जग की आंखों को भरमाये

जगति के ये नियम निराले

सही गलत के छलके प्याले

कुछ कुछ सही गलत में डूबा

कुछ गलती ना सही हो पाये

कैसे तू करनी को छलता

किस डोरी को कब है चलता

जोड़ घटा तेरी भी विधाता

आडंबर से बच ना पायी!

Quote

उम्र खाली एक नज़रिया!

जोश जब नादानियो का

बचपना तब दिल पे छाये

खून् रगों में खौल उठे

तब जवानी खलबलाए

चल रहा बेहद सम्भल कर

उम्र जब ढलने पे आए

याद में बीते दिनों के

खासता बुढापा जाए

लम्हा- लम्हा है बदलता

जोश भरता, या सिसकता

भुल सब, नादानी करता,

और कभी सम्भल के चलता;

औ’ बदलती उम्र संग में

पल में बूढी, पल में बच्चा

वक्त के हाथों मे खेले;

उम्र का चेहरा ना पक्का ।

नज़रिया

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तुमने खोया तुम्हारा तुम होना !

चाय से जो चली दास्ताने

होठ पे जो रुकी थी मुस्काने

नेह के कोर-कोर झुठला के

तुमने खोया हरिशचंद्र होना

तुमने खोया तुम्हारा तुम होना!

सुख दुख जो मिल बंट जाते थे

आतुर अंतर मदमाते थे

इच्छाओं के क्षणिक मोह मे

स्वप्न नगर का जीवन जीना;

तुमने खोया तुम्हारा तुम होना!

एक मन बांवरा तुम संग जीता

शब्दो से तेरे क्या ना सीखता

आशाओ की अपूर्व गागर का

उथला रीता पोखर होना

तुमने खोया मेरा निश्छल होना!

और बहुत कुछ जो है खोया

कौन ये गिनती कर पायेगा

उन भावों का, बीते कल का

मोल कोई क्या कर पायेगा

तुमने खोया एक जीवन सलोना!

निस्वार्थी वो रिश्ता था एक

ना छल कोई, ना दीवारें

मनमोहन के अतुल्य पदम से

दो नयना तुमको ही निहारें

वो अनमोल धरोहर खोना

दो बैना जो पूछ तुम्ही से

खोला करें अपनी पतवारे

कुछ बातों से संबल पाना

कुछ से कहीं एक ध्येय बनाना;

एक जीवन का कहानी होना!

और गिना कैसे मै पाऊं :

हम-तुम से हम और तुम होना

सिर्फ तुम्हारा मेरा जो मय था

उस मुझ मे से मेरा भी खोना

तुमने खोया तुम्हारा तुम होना !

मैंने वो खोया जो मेरा कभी था ही नहीं ; लेकिन तुमने वो खोया जो सिर्फ तुम्हारा था …..

Quote

Someday the hurts will be forgotten.

And the secrets of being free will  unfold

The learning will dawn into the being

“Whatever shall be shall be”!

.

The book of life may have many,

But the last pages shall actually define;

How best of each day we could make-

So smile, forgive, believe and just LIVE.

In the end we all become Stories