Monthly Archives: July 2017

Quote

अनकही से कितना छोटा है कुछ शब्दों का संसार
अधरों से कितना आगे है इन आँखों का विस्तार !

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किस किस बात को, किस किस नाम को, दोष लगाया करती

कभी हँसी में, कभी दुखी हो याद सजाया करती

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जो दिन कभी ना बीते थे पर, कभी सजाए मन ने

रोज़ उन्ही को जीते जीते,युगों संजोये पल में

.

पाया सबकुछ,खोया ना कुछ हरी कृपा सरमायी

फिर भी जाने किस चाहत ने नींदें मेरी उड़ायीं

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गलियों गलियों ढूँढा फिरती रही मगर अधूरी

तुम मेरे अंतर में रहते बने हुए कस्तूरी

तुम मेरे मन की कस्तूरी।  

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या इलाही वो लाख क़समें झूठी खाते रहें

हम ऐतबार में ये दिल यूँ ही बिछाते रहें

बेताबियाँ मगर औरों से गुफ़्तगू की हो

कब तलक नज़रों से फ़रेब हम छिपाते रहें

….

हार बैठे ख़ामोशियों से एक दिन फिर हम

और नाराज़गी बेरोक फिर जताते रहे 

हँसी में यूँ ही उड़ा चलते रहे कुछ तो तुम 

और कुछ हमसे बिफर, हमसे उखड़ जाते रहे 

……

सिहर से जाते तेरी बेरुख़ी के आलम से

कभी अपने ही को इल्ज़ाम हम लगाते रहे

कभी ख़ुद को रोकते चलते, कुछ ना कहने को 

कभी शब्दों के तीर भर भर चलाते रहे

…..
ना तुम रुके, ना हम रुके, ना वक़्त रुक पाया

बस शिकवे कम, ना कम शिकायतें ही हो पायीं

इतनी नज़दीकियाँ, बेबाकियाँ बढ़ी या रब

की दूरियाँ के फ़ासले भी कम ना कर पायीं

ना जाने सोचते हो तुम क्या, हम तो बस हारे

कभी चुप थे, कभी हँसते तुम्हारे सहारे 

ना ये चुप खोती, ना खोते तुम, खोते ना हम-तुम

ख़ुद ही को ढूँढे है आज, बिना सहारे !

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It’s been long 

The clouds don’t come 

The rains dnt smell

Anymore 

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It’s been long

The clouds come 

And the clouds go.

Unpoured 

.

It’s been long 

The eyes then shed 

The Misty pearls 

And heart silently 

Uproars

.

It’s been long

The hopes keep loosing 

The despair shining 

O LoRd!

Gimme O Lord.

The ears to hear 

The eyes to see

The soul to serve 

The lost

.

Gimme O Lord

The hopes that gives 

The strength And smile

And makes one live

Through all

.

Through all that’s dark

Through all that’s pain

Through all that leads

To sunken beds of 

demon’s reigns

….

The seeds are sown

But seeds don’t grow

And not a drop there 

Not a soul show

The sun 

.

I rise to those

That bear all smiles

And still keep pace

With heads held high
I seek the light 

I seek the path

That shows me way

To Thee, to the divine

.
I walk and I walk

And I cling to belive 

One cloud will shower

The million streaks

Of pearls 

….
The seeds will sprout

The sun will smile 

And eyes will glisten

Saluting the life 


To Thee I owe

To Thine I shall go

To get what’s mine

To give what’s Thine –

Surrendered…..

I bow!!!

Famine

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जाने कहाँ को हैं खो गयीं 

रोज़ ही तो हुआ करती थी कभी 

खनकती सी हँसी से भरी हुई 

आज ना ढूँढ़े से जो मिल है रही

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रस्ते जैसे गए हैं भटक कहीं

या वक़्त से ही तो छिटक कहीं

गिर गयी, चोटिल, या टूटी ही

कुछ भी क़िसीको तो  पता नहीं

.

व्यस्त होते गए कब नाम सभी

दूर होते गए फिर धाम सभी 

ना बिछें अब बिसात चौपड़ सी

ना मिले अब मियाद फ़ुरसत की 

.

ना चाय की चुस्कियों से भरी

ना दोस्त के चुटकुलों से भरी

ख़ाली है जेबें वो बेफ़िक्री की

 शाम के साथ सभी खोती गयीं

.

खो गयीं हैं शामें 

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This hourOf serene silence,

A blacked out sky

Masking in its charcoal-

The vivid day’s light.?

The colours of life,
And awake conscience…
I sit and gaze 

At the dreamy stars that shine

Sparkling the raven blanket

Of the endless skies

And while the world sleeps

The crazy me’s awake

In the pin drop past the sunset
My songs and dance narrate

The tales of perfect pleasure

The songs of silent smiles

The beauty that’s soul deep

The lyrics that spell life !!!!

Night 

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हक़ीक़त से बहुत दूर है ख्वाहिश मेरी
फिर भी ख़्वाहिश है कि एक ख़्वाब हक़ीक़त हो जाये
हक़ीक़त कुछ कुछ पर ख़्वाब रहे
कि ख़्वाहिश थोड़ी बाक़ी भी रह जाये

तुम लबों पर अफ़साने तलाशते रहो
ख़ामोशियों से फ़साने बन जायें

और कुछ ख़्वाब ख़्वाहिशों से हक़ीक़त के बीच
नज़रों के जहाँ में बस जायें !

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गुफ़्तगू शौक़ से दुनिया से निभाते तो हो

कभी फ़ुरसत मिले तो सोच ये भी लीजेगा

फ़ुरसत भर का महज़ रिश्ता हुआ क्या हमसे ??!!!

रिश्ता 

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As if there’s a quest

Of who’s hurt more

As if there’s to prove

Who’s indifferent to core
And there’s a lul

And time stands still

Though I keep busy

Yet nothingness drills
Drills me through the heart

Drills me to the floor

Of the deep Black Sea

With all depths and no shore
Is it the salt of waters

Marking on it’s trail

I’m tired wiping it off

My endeavours all frail 
Getting up efforts

Bracing all with smile
letting go attempts

And failing every while 

How many sorries sent

Sullen faces whined

Cold hearted’s wall

They strike nd rewind …..!!!!!!
And I sit with words

Unjumbling the maze

And I sit midst crowd

Solo and just dazed !

Silly moments