Monthly Archives: February 2017

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फ़ितरत है उठा लेना तलवारें ज़र्रे ज़र्रे पे

झुकाना नज़रों को सीखा कहाँ है शोख़ लहरों ने 

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किसी की सौ बरस की थी 

    किसी की छोटी ज़िंदगी 

    पलों में या बरस में जी

    उमर उमर की बात है 

    कभी सुबह ही ना हुई

    कभी तो रात ना कटी

    ये ख़्वाब से ही  पूछ लो 

    सहर सहर की बात है