Monthly Archives: November 2016

Quote

इस ओर सभी बन्धु बाँधव

बचपन से सिंचे रिश्ते सारे

स्मृतियों की गठरिया से छलके

नयनों में रुके मोती धारे
उस ओर नया संसार खड़ा

विस्तृत  दो बाहें पसारे

अनजाने अनेकों चेहरों में

दो नयन पिया के मतवारे
एक पग रुकता एक पग बढ़ता

अंजन गंगा जमुना घुलता

सिंदूरी सपने डग भरते

हौले हौले परिणिता चली
नयनों की डगर सीली सीली

सपनों से मगर थीं रंगीली

सहमे सकुचे झिझके मन ने

चुप चाप शोख़ियाँ सब पी लीं

लाली लाली पग डग भरते 

सुख से भीनी दुःख से ग़ीली
सुख से भीनी दुःख से गीली !!!!!

विदा 

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दिन जागते सोते खिसक रहा
अधलेटा सा ऊंघता सा
थोडा सा भी जो बस चलता
सूरज को धकेल किसी कोने
चंदा, तारों को बुला लेता
एक दिन की छुट्टी लेता दिन
दो रातें साथ सटा देता
एक रात जगी, एक सोती फिर
और एक छुट्टी के बाद का दिन
फिर खुली आँख, ताज़ा होता !

Quote

ये गुस्ताखियाँ बेसाख़्ता दिल अज़ीज़ी ही तो हैं

कभी हम रूठे कभी आप रूठे जाते हो


दौर-ए-हक़ से हमें ना जाने, ज़रा गफ़लत है

आप क्यूँ दिल पे सभी बात लिए जाते हो


एक दिन ख़्वाब भी जग जाएँगे ठोकर खाकर

चार लमहों की रात पे क्यूँ क़हर ढाते हो 


जीते नींदों में, खुली आँख, गुज़र जाएँगे …..

छोड़ो क्यूँ मेरी निरी ज़िद पे उखड़ जाते हो !!!!


आज फिर से क़सम खायी है सुधर जाने की

झुकी नज़रों में मगर आप ही मुस्काते हो !!!!!


या इलाहि, मगर एक उम्र हुई दाद सुने

कभी झूठे ही आप यूँ ना बहक पाते हो 


नींद ही तोड़ के एक बार जाम यूँ भी उठें,…….

लाख कह लें पर आप ना सुन पाते हो 

ख़ैर, जाने भी दो, नादान तमन्नाएँ हैं

खामखां मुझसे क्यूँ नाराज़गी जताते हो 

ये नवाबी किसी इनायत से कम तो नहीं 

मिज़ाज मेरे सभी आप जो निभाते हो !!!

इनायत 

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There are days when come some days

Waking up on different beds

Pair of eyes two, but they brew

Similar smiles & similar dreams-

And somewhere a flower is sold !
There are days in those some days

Living a cuppa in the mind

One sips in the meeting though

One holds & then, pours and goes-

And somewhere a tear’s on hold !
There are also then those days

Progressing the mundane ways

Sun comes and does what it does

Busy as life seems to get

Slowly then the moon climbs up

And somewhere a star turns gold !
One pair of eyes holds a book

One pair of eyes beholds pen

And as fingers grip on one

One more silly poem gets done 

And somewhere a story’s told !!!!

Someday, Everyday

Quote

कहता एक मन 

तुझको मानूँ

मन से सारे

भेद मिटा दूँ
दूजा कहता

खोलो आँखें

सपनो में ना

बहको जाके
किसकी सुनलूँ

कैसे जानूँ

किसे वरण कर

क्या झुठला दूँ 
हरदम तो 

मन की ही मानी

जग की कभी ना 

समझी वाणी 
फिर ये कैसे 

प्रश्न संभालूँ

लड़ूँ तुम्हीं से

तुम्हें माना लूँ
फिर फिर जब जब

बात उठा लूँ

फिर लड़ लूँ

और चाहूँ माना लूँ ……

दुविधा