Monthly Archives: August 2016

Quote

Flipping aimlessly 

Through nothingness

Walking solitary 

Amidst the crowd

Thinking just inorder to 

“Not think”

A pause , a while

And a frown –

Meet a confused,

Withered smile

Tired of adorning the curve

Miles and miles.
As if instantly 

Like love at first sight

They agree to be friends

Through the wrongs 

And the rights

Holding hands

Singing silently

The beauty of misty pearls

They walked and walked all night 
Stayed everywhere 

Other than the desired

Did everything

Other than the want

And the frown  loosened

And the smile  smoothened 

No vodka to intoxicate

They needed 

While casually strolling

Far, the life sighed !

Withered smile

एक ख़याल 

Standard

नींद अब आ ही जायेगी
बड़ा मुन्तसिर है सफ़र
ना तुझे पाने की ही फ़िक्र
ना तुझे खोने का डर ।।

Quote

The soul -But forever, a nomad…

Searches for

An Adobe just here-

For the moment this,

For the moments forever.

The roads be the destiny

And travel wherever;

With souls on fire,

With souls alike,

A pause, a rest,

And yet another drive-

Through the wilderness ,

Through all the wild.

A quest, a fight,

To conquer self thine

The soul, that’s inside 

And to unleash free

The soul that’s a child !

Nomadic soul

Quote

कभी कभी मन थक जाता है
संघर्षों से घबराता है

ख़ुद ही से कुछ उकताया सा

बीच राह ही थम जाता है
बीज फ़लसफ़ो के बोता है

बाँह ख़्वाब की मरोड़ता है

मुस्कानों से रूठा रूठा

झील आँख की बन जाता है

१०/८/२०१६

Quote

खोल के बैठी आज हूँ पेटी

भरी हुई स्मृतियों की

किसी बात ने याद दिल दी

अनगिनत कड़ियों की

.
चलते चलते नज़र पड़ी 

और मुस्काते था उठाया

रंग ये तुमपे ख़ूब फबेगा

एक ख़याल इतराया

.
उन कपड़ों का कर आलिंगन

सोच सोच मुसकाती

तुम्हें जो दे दूँ क्या बोलोगे 

हँसी रुकी ना जाती

.
और वो नन्ही सी एक डिबिया

जो मन को भायी थी

बड़ा ढूँढ के उसमें रखने

एक इत्र लायी थी

.
जो तुम रोज़ ही थामे रहते

उन किताबों में बसने

चार पंक्तियाँ बड़े यतन 

पत्ते पे लिख पायी थी

.
कभी नाज़ से याद करो तुम

नाम मेरा ले पहनो

शोख़ एक गलबंध मुझही सा

एक उठा लायी थी

.
रंग भी हों कुछ हल्के हल्के

ख़ुशबू भी जो याद सी छलके

कभी लिखो तुम भी कुछ शायद

तूलिका खिसकायी थी

.
और भी जाने कितने सारे

भरे हुए हैं यहाँ ख़ज़ाने

और भी जाने कितने अक्सर

रोज़ उठाती, जोड़े जाती

.
जैसे एक वो रजनीगंधा

चुरा लिया था तुमको देते

यहीं बसा है पन्नों में वो

दो आँखों की चमक समेटे

.
एक रूमाल पे नाम उकेरा

एक चित्र में मन का फेरा

कुछ यूँ हीं सा जाने क्या क्या

बस दे दूँ, मन कितना मेरा

.
और अक्सर ही फ़ुर्सत में फिर

थाम उन्हें यादें सजाती

तुम्हें बिठाती बीच में उनके

हर पल छू के जीती जाती

.
वो चुस्की  भी नहीं हूँ भूली

याद वो मन्नतें  भी

डूब के इन कड़ियों में तैरना

सुख अनंत पर ये ही 

.
सोच रही गर दे दूँ तुमको

कैसे रह पाऊँगी

इनके संग तुमको हूँ जीती

कहाँ तुम्हें पाऊँगी 

.
हो मन में, पर सपने जैसे

बड़े अधूरे लगते

थोड़ा थोड़ा जोड़ रही यूँ 

 तुमको पूरा करते !!

ख़ज़ाना 

Quote

कहाँ से ढूँढ के लाऊँ सियाहि और कलम
कि जिस से रोज़ नज़्म एक तेरे नाम लिखूँ
नज़र ये ख़्वाब से जो जाग कभी पाए तो
दिनों में गूँथ सुबह और कभी शाम लिखूँ

बड़ी हसरत है तुम्हारी बना के हार कभी

मेरे हर्फ़ों को डाल बाहों में, तुम में मैं दिखूँ

इसी हसरत पे रोज़ जीते, रोज़ मरते हुए

उन्ही शब्दों से खेल करूँ, बार बार लिखूँ

कहें हैं लोग कि ये रोग लाइलाज बड़ा

करूँ तौबा, वास्ता इससे दूर से ना रखूँ

बच के गुज़ारा करूँ परछाइयों से भी मैं तेरी 

रोज़ ही तेरी ही सूरत पे मगर आ के टिकूँ 

खुदाया एक इन्हीं हसरतों से बँध के तेरी

हज़ार हसरतें अपनी क़त्ल करते मैं चलूँ

हाथ रोकूँ जो कलाम थामने से गर मैं कभी

झुकी नज़र से लाख नज़्में रोज़ ही मैं लिखूँ !!

Inspiration credits Ranjula ….awesome day !!!

1/8/16

तेरे नाम की नज़्म