Monthly Archives: June 2016

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काम में ख़ुद को भुला लेते हैं

दिन यूँही रोज़ बिता देते हैं

कितने ही ख़्वाबों की दस्तकें

अनसुनी करके मिटा देते हैं 

वो जो सिखलाते हैं जीना जग को

अपना जीवन ही गँवा देते हैं

रश्क उनसे भी हुआ करता है

ग़म जो हँस हँस के छुपा लेते हैं

हम कहाँ आएँगे किस गिनती में

हम तो ख़ुद को भी दग़ा देते हैं

एक ग़ज़ल 

सुबह सवेरे

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थोड़े फूल, थोड़े पेड़
छोटा सा बगीचा एक
सुबह नींद को चिढ़ा के भागे
चरपर चू चू चिड़ी अनेक
एक गिलहरी पीछे पीछे
इक तितली पल्लव के नीचे
खेल रहे कबड्डी टिड्डे
गैया देखे अंखिया भींचे
भोरे भोरे सगरे जागे
आँख खोलते सूर्य के धागे
सिन्दूरी से कनक में ढलते
पवन बदलती अपनी रागें
एक सरगम जो कान में घुलती
एक अंजन में ज्योति भरती
एक जीवन में स्पंदन मद भर
साँसों से रचती संसार !

Budhaapa

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Waqt rukne lagaa hai
Saans bharne lagaa hai
Khankhanaati hansi  pe
Oos  jharne lagaa hai

Badh rahin hain laqeerein
Chehre aur haath par bhi
Bin kahe bola krte
Taulne shabd lagaa hai

Soorya  ki chaah thi kal
Chaandni aaj bhaati
Anginat doston se
Man ye darne lagaa hai

Umr kuch dhal rhi hai
Aisa hai log kehte
Dil ka lekin wo bachcha
Phir machalne lagaa hai

Nahi parwaah jag ki
Karni ichchaon  bhar ki
Mere aangan ki kaliyon se
Mera sambal juda hai

Naam jiska budhaapa
Bade karmon se aata
Abhi hain aur intehaan
Josh badhne lagaa hai 

Haule se chal rhe lamhon pe
Madhyam paaon rakhte
Ek lakadi ki lekar tek
Pag bharne lagaa hai

Waqt dheemi hi lekin chaal se
Chalene lagaa hai
Umr dhalti sahi
Man to mera sthaayi rha hai !!!

चुलबुली

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एक दिन बड़ा भी हो जायेगा
वो जो मन में रहता बच्चा
जिस दिन लेगा सीख वो जग का
पाढ़ सभी, झूठा और सच्चा
उस दिन तैर रही आँखों में
वो शैतानी खो जायेगी
जो होठों पे चुलबुल रहती
वो मुस्कानें सो जाएँगी
चुप में कहीं समा जायेंगे
बोल जो तुमको आज हँसाते
करते रहना याद बैठ के
आज हो मुझको डाँट लगाते !!!!!