Monthly Archives: July 2015

इतनी सी बदमिज़ाज़ी

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प्याले में कहाँ आ सके
बोतल शराब की
आँखों में देखते रहे
और डालते गए!

अरसे के तलबगार हैं
ये प्यास बुझे ना
बारिश बड़ी नमकीन है
ज़ज़्बात भर गए!

हर्फों का खेल ही तो था
खामोशी ने खेला
नज़रों की खताओं से
सौ गुनाह कर गए!

ना नाम के थे मोहताज़
ना ही ताज के
कुछ कहते कहते रुक गए
हँस के गुज़र गए!

एक लम्हा था रुक कहीं
हाथ छुड़ा के
इतनी सी बदमिजाजी थी
अफ़साने बन गए!

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कौन कहता है कि ज़ज़्बात बदल जाते हैं
वक़्त के साथ खयालात बदल जाते हैं
महज़ तस्वीरें बदलती हुई देखीं हमने
ना कोई बात, ना इंसान बदल पाते हैं

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हम ख़ाक चले साथी बनके
तुम चल भी रहे और ना भी चले
बस एक नज़र का फेर ही था
तुम तुम ना रहे हम हम ना रहे

अधूरी सारी बातें

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रात आधा चाँद मुझको ताकता है
और आधा जाम आँखों में घुला है

बोल आधे ही घुले से बात में हैं
नैन आधे ही खुले, कुछ ख्वाब में हैं

चल दिए कुछ दूर तक धीरे से बादल
और आधी दूर जाके क्यों रुके हैं

रात रानी की महक आधी उड़ी सी
और कुछ फूलों में बस के रह गयी सी

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते-

चाँद मेरी खिड़की में से झांकता सा
बादलों का जिसपे पर्दा सा गिरा है

रात रानी खुशबुएँ बिखेरती सी
गुलदान में खड़ी शरमा रही सी

रोज़ ही एक ख्वाब बनता है कहीं पे
हाथ तेरे ख्वाब मेरे पालते हैं

है बड़ी ही खूबसूरत सी, अधूरी सारी बातें
रह रहीं हैं संग हमारे, गुन गुन गुनगुनाते

थाम के तुम चल रहे हो हाथ मेरा
सब अधूरा, पूरा बस एक साथ तेरा!!!

देखो पंख लगे हैं गाने

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दूर गगन में फैलाये पर
चाँद को छू लेने को तत्पर
नन्ही चिड़िया छोड़ घरोंदा
आज भरे ऊँची उड़ाने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

चीलों का डर नहीं सताता
ना थकान से मन घबराता
मिटा असंभव का अस्तित्व
उड़े आस के छेड़ तराने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

खेल सभी बचपन के छूटे
लहु यौवन का बाहें खींचे
तान उमंगों की कमान
जग को अपनी हस्ती दिखलाने
देखो पंख लगे हैं गाने ।

लत

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जो उतर रही हलक से
हो करीब तेरे लब के
वो जला रही मुझे है
मेरी रूह पे हैं छाले

कहीं दूर थाम खड़े तुम
कई जाम खनखनाते
मेरे कानो में अनायास
ज्यो बिखर रहे हैं प्याले

जो मैं हाथ थाम पाती
तेरे मन को भरमाती
तो नशा नज़र का होता
बेज़ुबानी गाती तराने

कभी हार मान जायें
कभी कोशिशें जुटायें
ये दिल अजब है वहशी
किस्मत के दाँव डाले

नाराज़गी भी तुमसे
मुस्कान भी, कसम से!
कभी छोड़ना ना ये दामन
या रब, कसम ये उठा ले ।

ये ही “शब्द” गूंजते हैं
होनी को गूंथते हैं
इनकार कर ना; तू डर ना
मेरे सुर से सुर तू मिला ले ।।