फ़िदा

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साहिल से समुन्दर पूछ रहा-
वो कौन सी खूबी है तुझमे?
जिस शख़्स का हाल कभी पुछा;
तुझपे ही फ़िदा वो रहता है!

दूर-औ-दराज़ से आतीं सब
नदियां मेरे आगोश में हैं;
फिर भी तेरा ही नाम लिए
उम्मीद का दरिया बहता है ।

साहिल ने कहा मुस्का के ज़रा,
“चख लेना अपना स्वाद कभी।
तुम बाँध रखो आगोश में जग;
पंछी उड़ने को कहता है।”

नज़राने हीरे मोती के
कब काम किसी के आते हैं?
बस चंद साँस आज़ादी की
पाये वो दीवाना रहता है !

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