Monthly Archives: July 2014

वृष्टि

Standard

प्यासी धरा पे
बूंदों का मृदुल नृत्य
और संग थिरकता
मन रसिक कृष्ण सम
जल थल के प्रणय मिलन
रास में परमानान्दित
पल्लव पल्लव फिसल
टिप टिप गुनगुनाता
रोम रोम उत्साहित
ज्यो मन एक मयूरा।

उड़े सीली हवा संग
सोंधी माटी लगा अंग
तपित क्लांत जड़ों की
उम्मीद को जीवंत कर
धूसरित कुसुम कुसुम
में नव रस रंग भर
तितली सा ठौर नहीं
बिजली सा प्रखर यहीं
इसी प्रबल मेघ वेग
तांडव पे मगन गगन
हरित रचे जीवन
फलित मन आँगन।।

मधुरस

Standard

दिल को है बिमारी या उमंगों का है खुमार
एक जिक्र से तेरे चढ़े सौ जाम का नशा।

किस मय में वो दम है जो चढ़े इस नशे के बाद
साकी बने जो तुम तो उम्र भर रहे नशा ।

तुम जाम गिना करते हो और चाँद का इंतज़ार
दिन रात जो रहे और बढे वो चढ़ा नशा ।

अब कौन सा सूरज जो उतारेगा ये खुमार
ताउम्र तेरे नाम से झूमेगा दिल मेरा ।

Acceptance :)

Standard

The raods may lead to nowhere
But its a beautiful journey with you my friend!

Another crossroad I come across
And this time i let my heart choose!
Mistake i may commit
But not regret later
Than if I didnt
And missed it later.

And support from you
My ever strengths
Keeps the flame kindled
To strife on…..
Strife on and carve out-
A niche exclusive,
A name beautiful,
Unknown to many
But all so wanted

It stands to adorn
With open hands
Welcoming me
As i stride fast
Reaching out
To hold those hands
And my guiding angel
There u too stand….
The journey shall be a feast
I know for sure!

मदहोशी

Standard

मय के मद में भी झूम लिया
मदहोशी का कुछ स्वाद लिया
जाना ना मगर क्या लुत्फ़ भला
जो जीवन क़शिश को दे ये भुला

एक ठूठ से जब पल्लव झांके
या कलिका आँचल को खीचे
एक पेड़ पे लटके नीड़ में से
दो छोटी सी चोंचें चेहके

एक दूर बज रही धुन पे मगन
थिरके मयूर तक धिन धिन धा
या शब्दों को किसी के सुन
विव्हल हो उठे मन मतवाला

बालक के मुख से माँ का स्वर
माता का निश्छल आलिंगन
प्रेमी के नयनो से झरता
अनुराग में डूबा आकर्षण

माय में है कहाँ वो मदहोशी
मन के अंतर तक झंकृत हो
जो पल के जाने पर भी जिए
अविरल लब पे मुस्कान रचे ।