Monthly Archives: April 2014

बूँद

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बादल के पहरे तोड़
भागी इतराती
अनगिन बूँदें
अपना भाग्य आजमाती
अम्बर से बिखरी

एक गिरी हरीतिमा की गोदी
पत्तों में शरण पायी
पल्लव हिंडोले में झूलती
वो पुचकारते, दुलराते, ये मुस्काती
जा “ओस” बनी।

एक गिरी प्यासे कंठ तले
जो रुग्ण, तरसता पानी को
आकंठ उसे, तृप्त नेह मूँद
अपनी अंतिम यात्रा को चला
ये “दैव्य” बनी।

एक गिरी धवल वस्त्र शोभित
तन पर, पर मन कलुषित किंचित
न सहन कर सका रंग ज़रा
ये “दाग” बनी।

एक गिरी नेह के कोरों पे
गंगा-जमुना सी धारा बन
कोपल पर रेखा सी उतरी
उस हृदय व्यथा को गीत बना
ये “आंसू” बनी।

एक तपती धरती पे जा गिरी
उसकी ऊष्मा अपने में ले
अपनी शीतलता उसको दे
अपना अस्तित्व मिटा चली
ये “वाष्प” बनी।

एक दूर समुन्दर का रुख कर
लहरों के उफान में जा सिमटी
एक सीप के अंतर में जा छिपी
पा उसको बनी सीप अनमोल
ये “मोती” बनी।

एक जा पहुची खेतों में जहाँ
कृषक था बाट जोह रहा
उसके स्वागत में नत, जो
फसलों को जीवन दे
“वरदान” बनी।

जितने अंजुल उतने ही मंत्र
जितने जीवन उतने तर्पण
समय फेर में बनती मिटती
हर दिन अनगिन बूँद नवल
और कथा नयी।।

Canvas

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The strokes of my brush
That dance over the platter
Tip-toeing over the rainbow
Spread of colours
Colours of smile, of fun,
Pleasure, hope and love
Sunkissed, bright
Radiant day and night
Blending here and there
Nurturing at each stroke
A face, a delight
A gem to the sight
And did u ever try
To catch a glimpse?
Find your reflection
In the little world of mine!
For the fragrant moments
Of cheer and romance
My friend, makes the picture
On the canvas just right!!!